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क्या सोने और चाँदी में मौजूदा शांति सिर्फ तूफान से पहले की खामोशी है?

सोने-चाँदी के बाजार में इस हफ्ते तुलनात्मक रूप से थोड़ी शांति जरूर दिखी है। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उतार-चढ़ाव पूरी तरह थम गया है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। खासतौर पर अमेरिका की राजनीति और मध्य-पूर्व से जुड़ी संभावित घटनाओं का असर कीमती धातुओं की चाल पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। सोने की बात करें तो तकनीकी स्तर पर 5100 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। जब तक सोना 5100 के ऊपर मजबूती से नहीं निकलता, तब तक इसमें नई तेजी की पुष्टि नहीं मानी जाएगी। मौजूदा रेंज 5100 से नीचे 4650 और फिर 4400 तक देखी जा रही है। यानी 5100 के नीचे सोने को “सेल ऑन राइज” की रणनीति के साथ देखना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। अगर किसी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम, जैसे ईरान पर हमला, जैसी स्थिति बनती है तो तस्वीर अचानक बदल सकती है, लेकिन फिलहाल ट्रेंड सतर्क और सीमित दायरे में है।

चाँदी की स्थिति सोने की तुलना में कमजोर नजर आ रही है। चार्ट पैटर्न में लगातार तीन लोअर टॉप बनते दिखाई दे रहे हैं, जो कमजोरी का संकेत है। यह संरचना ट्रायंगल या उल्टे फ्लैग जैसे पैटर्न का आभास देती है, जिससे नीचे फिसलने का खतरा ज्यादा लगता है। जब तक चांदी अपने प्रमुख रेजिस्टेंस स्तरों को पार नहीं करती, तब तक इसमें मजबूती की उम्मीद करना जोखिम भरा हो सकता है। तकनीकी रूप से इसे अभी कमजोर धातु के रूप में ही देखा जा रहा है।

डॉलर में कीमतों की बात करें तो वहाँ भी चाँदी में लोअर टॉप और लोअर बॉटम का पैटर्न दिख रहा है। लगभग 93 डॉलर के ऊपर निकलने पर ही इसमें सकारात्मक रुझान की संभावना बनेगी। उससे पहले किसी भी उछाल को टिकाऊ तेजी नहीं माना जाएगा। सोने में 5100 के ऊपर और चांदी में 93 डॉलर के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट का इंतजार करना समझदारी होगी। तब तक दोनों धातुओं में सतर्क और रणनीतिक रुख अपनाना बेहतर माना जा सकता है।


(शेयर मंथन, 16 फरवरी 2026)

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