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इस साल का अनुमान लगाना मुश्किल

पशुपति सुब्रह्मण्यम, रिसर्च प्रमुख, वेंचुरा सिक्योरिटीज

बाजारों की अनिश्चितता ऐसी है कि आगे आने वाले एक साल के लिए कुछ कहना काफी मुश्किल है। यह लोकसभा चुनाव का साल है, ऐसे में चुनावों से तीन महीने पहले और इसके तीन महीने बाद यानी कुल छः महीने तक नीति निर्धारण का काम रुक जायेगा।

वैश्विक हालात अच्छे नहीं हैं और बड़ी कंपनियों की ओर से खराब नतीजे आने का सिलसिला जारी है। हमारी आईटी कंपनियों के ग्राहकों की एक बड़ी संख्या बाहर से है। जनवरी में आईटी कंपनियों के ठेकों का नवीनीकरण होता है। ऐसे में यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि उनके कितने ग्राहक नवीनीकरण कराते हैं और किन शर्तों पर।

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

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    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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