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कंपनियों की सुर्खियाँ

पहली तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 87.7% बढ़ा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुनाफे में 87.7% की बढ़ोतरी हुई है। बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 2168.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 4070 करोड़ रुपये हो गया है।

पहली तिमाही में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का मुनाफा 43% बढ़ा

देश के सबसे बड़े हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में से एक एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के मुनाफे में 43% की बढ़ोतरी हुई है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का मुनाफा 925.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1323.7 करोड़ रुपये हो गया है।

पहली तिमाही में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का मुनाफा 98% बढ़ा

ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। स्टैंडअलोन आधार पर मुनाफे में 98% की बढ़ोतरी हुई है। मुनाफा 1403 करोड़ रुपये से बढ़कर 2774 करोड़
रुपये हो गया है। वहीं आय में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में एसबीआई (SBI) का मुनाफा 178% बढ़ा

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। बैंक का मुनाफा स्टैंडअलोन आधार पर 178% बढ़ा है।

पहली तिमाही में डाबर का मुनाफा 3.5% बढ़ा

एफएमसीजी (FMCG) की दिग्गज कंपनी डाबर ने वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी के मुनाफे में 3.5% की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का मुनाफा 441 करोड़ रुपये से
बढ़कर 456.6 करोड़ रुपये दर्ज हुआ है।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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