बाजार में अक्सर एक शब्द सुनाई देता है- डेड कैट बाउंस। टीवी पर इसका खूब इस्तेमाल होता है, लेकिन निवेशकों के मन में इसे लेकर कन्फ्यूजन बना रहता है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि डेड कैट बाउंस आमतौर पर तब दिखता है जब बाजार या कोई शेयर बहुत तेज़ी से गिर चुका होता है। गिरावट इतनी ज्यादा होती है कि भाव बेहद आकर्षक लगने लगते हैं। इस स्थिति में जो ट्रेडर्स पहले ऊँचे स्तरों पर बेच चुके होते हैं, वे शॉर्ट कवरिंग करने लगते हैं। इसी शॉर्ट कवरिंग की वजह से कीमतों में अचानक एक उछाल दिखाई देता है। बाहर से देखने पर लगता है कि शायद बॉटम बन गया है और बाजार अब ऊपर ही जाएगा, लेकिन असल में यह तेजी टिकाऊ नहीं होती।
डेड कैट बाउंस की पहचान यह है कि इसमें समय बहुत कम होता है और दम भी कम। आमतौर पर यह एक-दो दिन या कुछ सत्रों की तेजी होती है। इस उछाल में वॉल्यूम का मजबूत सपोर्ट नहीं दिखता। गिरते हुए बाजार में जो रेजिस्टेंस ज़ोन बनते हैं, कीमतें उन्हें पार नहीं कर पातीं। न तो हायर-लो का पैटर्न बनता है और न ही मूविंग एवरेज जैसे 20 DMA या 50 DMA के ऊपर टिकाव मिलता है। नतीजा यह होता है कि शॉर्ट कवरिंग खत्म होते ही बाजार या स्टॉक फिर से अपनी नीचे की यात्रा शुरू कर देता है। इसके उलट, असली बॉटम बनने की प्रक्रिया एक दिन की नहीं होती। जब बाजार में पैनिक अपने चरम पर पहुंच जाता है। जैसे 2008 या 2020 में देखा गया, तब एक पैनिक बॉटम बनता है। लेकिन बॉटम बनने के बाद बाजार को उस स्तर को कुछ समय तक होल्ड करना पड़ता है। इस दौरान ट्रेडिंग बढ़ती है, वॉल्यूम में सुधार दिखता है और धीरे-धीरे हायर-लो का पैटर्न बनने लगता है। कीमतें 20 DMA, फिर 50 DMA के ऊपर टिकने लगती हैं और रिट्रेसमेंट्स ज्यादा हेल्दी होते हैं।
असली बॉटम की सबसे बड़ी पहचान यह होती है कि जिन फंडामेंटल कारणों से गिरावट आई थी, वे धीरे-धीरे सुलझने लगते हैं। अनिश्चितता कम होती है, डर घटता है और बाजार का व्यवहार बदलता है। तब तेजी सिर्फ शॉर्ट कवरिंग की वजह से नहीं, बल्कि नई खरीदारी की वजह से आती है। यही वह बिंदु होता है जहां कहा जा सकता है कि अपट्रेंड दोबारा बनना शुरू हो गया है।
सरल शब्दों में कहें तो अगर तेजी सिर्फ तेज गिरावट के बाद अचानक दिखे, वॉल्यूम कमजोर हो और रेजिस्टेंस पार न हों, तो वह डेड कैट बाउंस है। लेकिन अगर बाजार समय लेकर बॉटम बनाए, स्तरों को होल्ड करे, टेक्निकल संकेत सुधरें और माहौल में स्थिरता आए, तो वही असली बॉटम और टिकाऊ रिकवरी की शुरुआत होती है। निवेशकों के लिए यही फर्क समझना सबसे बड़ा बचाव और सबसे बड़ा मौका दोनों बन सकता है।
(शेयर मंथन, 03 जनवरी 2026)
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