मंगलवार को यूरोप और अमेरिका के शेयर बाजारों में आयी मजबूती के बावजूद बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा, हालांकि चीन के शंघाई कंपोजिट सूचकांक की चाल सबसे अलग दिखी और यह 6.05% की बढ़त दर्ज करने के बाद बंद हुआ। कॉस्पी सूचकांक 1.87% नीचे रहा, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स सूचकांक 1.59% की गिरावट के बाद बंद हुआ। इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट सूचकांक में 0.80% की कमजोरी रही। भारत में सेंसेक्स सूचकांक 1.83% की गिरावट के बाद बंद हुआ। हैंग सेंग में 0.77% की और ताइवान वेटेड सूचकांक में 0.49% की गिरावट दर्ज की गयी। जापान का निक्केई सूचकांक 0.66% की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।