शेयर मंथन में खोजें

डॉलर के मजबूती से सर्राफा की कीमतों में गिरावट की संभावना - एसएमसी

सर्राफा की कीमतें गिरावट के साथ खुल सकती है लेकिन सीमित दायरे में कारोबार होने की संभावना है।

सोने की कीमतों को 51,500 रुपये पर सहारा और 52,400 रुपये पर बाधा रह सकता है। चांदी की कीमतों में नरमी रहने की संभावना है और कीमतों को 68,300 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 67,200 रुपय् पर सहारा रह सकता है। रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण सुरक्षित निवेश के लिए सर्राफा की माँग में बढ़ोतरी के बावजूद डॉलर के मजबूत होने के कारण आज सोने की कीमतों में कल आज नरमी देखी जा रही है और कीमतें साप्ताहिक गिरावट की ओर अग्रसर है जबकि निवेशकों ने सक्ष्त नीतिगत संकेतों के लिए मार्च के अमेरिकी नौकरियों के आँकड़ों का इंतजार किया। इस हफ्ते सोने की कीमतों में करीब 1.1% की गिरावट हुई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को धमकी दी कि जब तक उन्हें रूबल में भुगतान नहीं किया जाता है, तब तक यूरोप को अपनी एक तिहाई गैस की आपूर्ति करने वाले करारों को रोक दिया जायेगा।

यह यूक्रेन पर उनके आक्रमण पर पश्चिमी प्रतिबंधें का प्रतिकार करने के लिए उनका अब तक का सबसे मजबूत आर्थिक जवाब है। डॉलर इंडेक्स लगभग एक महीने के निचले स्तर से मजबूत हुआ जिससे अन्य मुद्रा धारकों के लिए सोना अधिक महँगा हो गया। केंद्रीय बैंक के आँकड़ों से पता चलता है कि रूस का सोना और विदेशी मुद्रा भंडार 25 मार्च तक कम होकर 604.4 बिलियन डॉलर हो गया, जो अगस्त 2021 के 643.2 बिलियन डॉलर के बाद से सबसे कम है। (शेयर मंथन, 01 अप्रैल 2022)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख