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एक्सपर्ट से जानें क्या सोने-चाँदी के पुराने पीक को पार करना मुश्किल है?

सोने में आज उतनी हलचल नहीं दिखी, लेकिन चाँदी में फिर से तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर करीब 5% की चाल भले ही बड़ी लगे, लेकिन चाँदी जैसे बेहद वोलाटाइल कमोडिटी के लिए यह कोई असामान्य बात नहीं है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि चाँदी में हाल की तेजी किसी मजबूत बुनियादी वजह से कम और ज्यादा तर सट्टेबाजी (स्पेकुलेशन) की वजह से आई है। तकनीकी रूप से इसमें “रिवर्स फ्लैग” जैसा पैटर्न बनता दिख रहा है, यानी तेजी के बाद ठहराव नहीं बल्कि गिरावट से पहले की रुकावट हो सकती है। इसलिए फिलहाल इसमें नई बड़ी तेजी की शुरुआत के संकेत साफ नहीं हैं। 

सोना और चाँदी दोनों ही शायद अपने हालिया पीक के आसपास पहुंच चुके हैं। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि अगले 20-25 साल तक इनमें नई तेजी नहीं आएगी। पहले सोना-चाँदी का साइकिल बहुत लंबा हुआ करता था, लेकिन अब पेपर गोल्ड, ईटीएफ और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के कारण इनका साइकिल छोटा हो गया है। ज्यादा लोग और बड़े फंड इन मार्केट्स में आने से तेजी-मंदी के दौर जल्दी-जल्दी बदलने लगे हैं। इसलिए अब बुलियन में 8-15 साल के साइकिल को ज्यादा प्रासंगिक माना जा रहा है।

ग्लोबल पॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते सोने में लंबी अवधि की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। डॉलर के विकल्प के तौर पर सेंट्रल बैंक लगातार सोने की खरीद करते हैं। यही वजह है कि सोने में बड़ी गिरावट आते ही सेंट्रल बैंक फिर से खरीदारी के लिए एक्टिव हो जाते हैं। लेकिन चांदी एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी भी है, यानी इसकी कीमतों की एक सीमा होती है। बहुत ज्यादा महंगी होने पर चांदी से बनने वाले प्रोडक्ट्स अनअफोर्डेबल हो जाते हैं, जिससे डिमांड घटने लगती है। इसलिए चांदी में इक्विटी जैसी बेतहाशा तेजी लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल होता है। 

सोने की बात करें तो वहां तस्वीर थोड़ी ज्यादा साफ है। सोने में नई मजबूती तभी मानी जाएगी जब यह पुराने हाई के ऊपर टिके। फिलहाल इसमें भी रिवर्स फ्लैग जैसे संकेत दिख रहे हैं और एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कीमतें बड़े रेजिस्टेंस लेवल को पार नहीं करतीं, तब तक नई तेजी पर भरोसा करना मुश्किल है। सेफ्टी के नजरिये से सोने-चांदी में अभी “वेट एंड वॉच” की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। निवेशकों को बहुत ज्यादा उतावली दिखाने के बजाय बड़े करेक्शन या साफ ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।


(शेयर मंथन, 12 फरवरी 2026)

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