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15 साल में पहली बार बाजार में दिखी ऐसी गिरावट, भारतीय बाजार सतही : नितिन कामत

लगातार गोते खा रहे भारतीय शेयर बाजार को लेकर बाजार के जानकार परेशान हैं और खुदरा निवेशक निराश। ऐसे में जिरोधा को को-फाउंडर नितिन कामत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार व्यक्त किये हैं, जिसमें उन्होंने भारतीय शेयर बाजार को सतही करार दिया है।  

अब भी चलन में बने हुए हैं 2000 रुपये के इतने नोट, इन जगहों पर बदलने की सुविधा मौजूद

भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई, 2023 को 2000 रुपये के बैंक नोट को चलन से वापस लेने का ऐलान किया था। उस वक्त प्रचलन में मौजूद इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। वहीं आरबीआई के मुताबिक, 28 फरवरी 2025 तक बाजार में मौजूद इन नोटों की संख्या घटकर 6,471 करोड़ रुपये रह गयी है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि 98.18% नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं।

पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था, अगले वित्त वर्ष में भी 6.5% रह सकती है वृद्धि दर: क्रिसिल

नरमी से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था उबरने लगी है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ताजे आँकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर 2024 के तीन महीनों के लिए आर्थिक वृद्धि दर 6.2% पर रही। इससे पहले दूसरी तिमाही के दौरान वृद्धि दर 6% से नीचे गिर गयी थी। इसे विश्लेषक घरेलू अर्थव्यवस्था के वापस पटरी पर लौटने की तरह देख रहे हैं।

7.6 करोड़ ईपीएफओ सदस्यों के लिए बड़ी खबर, पीएफ की ब्याज दरों में नहीं होगा बदलाव

कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन ने 2024-25 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 8.25% पर ही रखने का फैसला किया गया है। इससे 7 करोड़ से ज्यादा खाताधारकों को लाभ मिलेगा। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्ट्रीज की बैठक में यह फैसला लिया गया।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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