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गुरुवार 13 जुलाई : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) आज पहली बार 32,000 के ऊपर बंद हुआ। आज के कारोबार के अंत में सेंसेक्स 232.56 अंक या 0.73% की मजबूती के साथ 32,037.38 पर रहा।

इसके अलावा एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 75.60 अंक या 0.77% की मजबूती के साथ 9,891.70 पर बंद हुआ।
कारोबारी साल 2017-18 की पहली तिमाही में बजाज कॉर्प (Bajaj Corp) का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के 52.19 करोड़ रुपये के मुकाबले 5.32% बढ़ कर 54.97 करोड़ रुपये रहा है।
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एनईएफटी (NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) के जरिये पैसे भेजने की अपनी सेवाओं पर शुल्क 75% तक कम कर दिये हैं। ये बदलाव 15 जुलाई से लागू हो जायेंगे।
केंद्र सरकार अब ऐसे लोगों की पहचान करेगी, जिन पर कर देयता (Tax liability) तो बनती है, लेकिन वे कर दे नहीं रहे हैं। इसके लिए सरकार खास तौर पर छोटे शहरों पर ध्यान देगी।
प्रीमियम वर्ग के यात्री वाहन बनाने वाली कंपनी स्कोडा ऑटो इंडिया ने गुरुवार को भारतीय बाजार में नयी ऑक्टाविया कार पेश करने की घोषणा की, जिसकी कीमत 22.89 लाख रुपये तक है।
कारोबारी साल 2017-18 की अप्रैल-जून तिमाही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ 5,950 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले कारोबारी साल की समान तिमाही के 6,318 करोड़ रुपये से 5.82% कम है।
दिल्ली सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जीएसटी पर व्यापारियों की परेशानियाँ दूर करने के लिए वह 6 मोबाइल हेल्प वैन चलायेगी।
योगगुरु और पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने सिक्योरिटी एजेंसी सर्विस के क्षेत्र में अपने कदम रख दिये हैं। इसके अलावा, बाबा रामदेव के ब्रांड पतंजलि ने भारत के शीर्ष 10 प्रभावशाली ब्रांडों में जगह बनायी है। (शेयर मंथन, 13 जुलाई 2017)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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