जारी है सत्यम का झूठ
राजीव रंजन झा
किसी किस्से में एक ठग आकर सबसे कहता है कि देखो, मैं बड़ा पापी था। मैं अब तक सबसे झूठ बोलता रहा और सबको ठगता रहा। लेकिन अब मेरी अंतरात्मा जाग गयी है। अब मैंने फैसला किया है कि अब मैं अपना सारा पाप सबको सच-सच बता दूँगा और कभी किसी से कोई झूठ नहीं बोलूँगा। क्या इस ठग की बातों पर यकीन किया जा सकता है?
इसके बाद उसी ठग के गिरोह के कुछ खास लोग आपके सामने आकर कहते हैं कि भाई इस ठग ने हमें भी धोखा दे रखा था। इसके गोरखधंधों के बारे में हमें कुछ भी नहीं मालूम था। लेकिन अब हम अपना काम बड़ी ईमानदारी से करेंगे। सत्यम के निवेशकों के सामने इस समय न केवल रामलिंग राजू के बयानों की असली सच्चाई समझने की चुनौती है, बल्कि यह उलझन भी है कि जो नया नेतृत्व सामने आया है उस पर वे कितना यकीन कर सकते हैं।