शेयर मंथन में खोजें

विप्रो (Wipro) की डॉलर आय 0.8% घटने की संभावना : आईडीबीआई कैपिटल

विप्रो (Wipro) के तिमाही नतीजों (Quarterly Results) से पहले जारी अपनी रिपोर्ट में आईडीबीआई कैपिटल (IDBI Capital) ने पूर्वानुमान लगाया है कि 2018-19 की दूसरी तिमाही में इसकी डॉलर आमदनी तिमाही-दर-तिमाही 0.8% घट कर और साल-दर-साल 0.2% बढ़ कर 206.2 करोड़ डॉलर रहेगी।

वहीं इस दौरान एबिट मार्जिन तिमाही-दर-तिमाही 0.80% अंक बढ़ कर 15.1% रहेगा। इस तिमाही के दौरान कंपनी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 4.6 रुपये रहेगी, जो ठीक पिछली तिमाही से 3.1% कम और पिछले साल की समान तिमाही से 1.3% ज्यादा होगी।
आईडीबीआई कैपिटल का आकलन है कि एलाइट सौदे की वजह से आईटी सेवाओं से विप्रो की आमदनी ऑर्गेनिक आधार पर तिमाही-दर-तिमाही 2% बढ़ेगी। वहीं होस्टेड डेटासेंटर कारोबार के विनिवेश के चलते होने वाला असर -1.20% अंक (2.35 करोड़ डॉलर) का होगा।
आईडीबीआई कैपिटल का कहना है कि इस तिमाही में विप्रो का एबिट मार्जिन 0.80% अंक सुधरेगा, जिसमें मुख्य योगदान रुपये की कमजोरी और कामकाजी सक्षमता का होगा। वेतन वृद्धि के चलते आये दबाव की भरपाई इन दो बातों के चलते हो जायेगी।
आईडीबीआई कैपिटल के अनुसार इन तिमाही नतीजों में मुख्य रूप से उसकी नजर इस बात पर होगी कि विप्रो तीसरी तिमाही के लिए किस तरह के पूर्वानुमान (गाइडेंस) सामने रखती है। आईडीबीआई कैपिटल को आशा है कि विप्रो नियत मुद्रा (कॉन्स्टैंट करेंसी) के आधार पर आईटी सेवाओं में 0.5-2.5% वृद्धि के पूर्वानुमान पेश करेगी। इसके अलावा नजर इस बात पर भी होगी कि एबिट मार्जिन और रुपये में कमजोरी के बारे में कंपनी की टिप्पणियाँ क्या रहती हैं। (शेयर मंथन, 24 अक्टूबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख