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आईटी शेयरों में निवेशकों को क्या करना चाहिए, खरीदें या बेचें?

आईटी इंडेक्स इस समय एक बेहद अहम मोड़, यानी इन्फ्लेक्शन पॉइंट, पर खड़ा हुआ है। मौजूदा परिदृश्य में 37,500 का स्तर आईटी इंडेक्स के लिए लक्ष्मण रेखा की तरह है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि अगर बड़े आईटी कंपनियों के नतीजों के बाद इंडेक्स 37,500 के नीचे बंद होता है, तो उसके बाद 1,000 से 1,500 अंकों तक की तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में 36,000 या उससे नीचे के स्तर भी संभव हैं। इसलिए नतीजों के दौरान सबसे ज्यादा जरूरी यही है कि आईटी इंडेक्स इस स्तर के नीचे क्लोज न करे। दूसरी ओर, यह इन्फ्लेक्शन पॉइंट सकारात्मक रूप भी ले सकता है। अगर आने वाले हफ्तों में वैश्विक संकेत कुछ बेहतर होते हैं, अमेरिकी बयानबाजी का रुख थोड़ा नरम पड़ता है और आईटी कंपनियों के नतीजे उम्मीद से अच्छे आते हैं, तो आईटी इंडेक्स में “कप एंड हैंडल” जैसा पैटर्न बन सकता है। ऐसी स्थिति में एक नया ब्रेकआउट भी देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल बहुत ज्यादा आक्रामक सकारात्मकता दिखाना जल्दबाज़ी होगी। सरल शब्दों में कहें तो अगर 37,500 के नीचे क्लोज नहीं होता, तो “सब चंगा सी” वाली स्थिति बनी रहेगी; लेकिन अगर यह स्तर टूट गया, तो बाजार दोबारा निचले स्तरों को परख सकता है।

इस पूरे माहौल में एक दिलचस्प विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है। बाजार की चर्चाओं में हर तरफ नकारात्मक बातें सुनाई दे रही हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड के आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। एसआईपी के जरिए हर महीने 31,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। यानी निवेशक बाजार से भाग नहीं रहे, बल्कि गिरावट के बावजूद लगातार पैसा लगा रहे हैं। यह दिखाता है कि डर और हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर है। 

इसके अलावा, समय के साथ निवेश को लेकर जागरूकता भी काफी बढ़ी है। कोविड के बाद घर बैठे निवेश करना आसान हो गया और एक बार जब लोगों को शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की आदत लग जाती है, तो वे उससे जल्दी बाहर नहीं निकलते। रियल एस्टेट जैसे विकल्पों में बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, जबकि इक्विटी ऐसा एसेट क्लास है जहां छोटे निवेश से भी शुरुआत की जा सकती है। आईटी इंडेक्स तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील स्तर पर है और 37,500 की सीमा तय करेगी कि आगे गिरावट आएगी या ब्रेकआउट। वहीं, लंबी अवधि की तस्वीर देखें तो इक्विटी में लगातार बढ़ता निवेश यह संकेत देता है कि भारत में निवेश का कल्चर मजबूत हो रहा है। शॉर्ट टर्म में वोलाटिलिटी रह सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में इक्विटी और खासकर म्यूचुअल फंड के जरिए बाजार में भागीदारी आगे भी बढ़ती रहने की संभावना है।


(शेयर मंथन, 10 जनवरी 2026)

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