विदेशों में मजबूती के रुख के कारण और स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से खरीदारी बढ़ने से सोने में एक सप्ताह के लिए तेजी बनी रही और यह 33,000 रुपये के स्तर को पार कर गया, लेकिन सर्राफा बाजार में 32,875 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
बाजार के सकारात्मक संकेतों के बीच सटोरियों की मुनाफावसूली से बृहस्पतिवार को सोना वायदा 0.5% गिरकर 31,071 रुपये प्रति दस ग्राम हो गया।
सोने की कीमतों को 44,900 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 44,400 रुपये पर सहारा रह सकती है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में 66,400 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 64,500 रुपये पर सहारा रह सकता है अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल द्वारा मुद्रास्फीति के नियंत्रण से बाहर नहीं होने को लेकर कांग्रेस को आश्वास्त करने के बाद डॉलर के दो हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुँचने के कारण आज सोने की कीमतों में गिरावट हुई।
एसएमसी कमोडिटीज ने आज अपनी दैनिक रिपोर्ट में कहा है कि इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से सर्राफा कीमतों को नयी दिशा मिल सकती है।
सर्राफा की कीमतों में एक दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सर्राफा की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में रहने की संभावना है।
सर्राफा की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे मे रहने की संभावना है।
सर्राफा की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित दायरे में रहने की संभावना है।
सोने की कीमतों में 49,300 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 48,300 रुपये तक गिरावट हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में 53,150 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 51,950 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
कोरोना वायरस मामलों में उछाल और अमेरिका-चीन के बीच तनाव के कारण सुरक्षित निवेश रूप से माँग बढ़ने से पिछले हफ्ते सर्राफा की कीमतों में निचले स्तर से बढ़त दर्ज की गयी लेकिन डॉलर के मजबूत डॉलर के कारण बढ़त पर रोक लगी।
सर्राफा की कीमतों में गिरावट होने की संभावना है।
सोने की कीमतों में 52,500 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 51,300 रुपये तक गिरावट हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में 66,000 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 64,200 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
सर्राफा की कीमतों की तेजी पर रोक लग सकती है और गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सर्राफा की कीमतों के मिला-जुला रुझान रहने की संभावना है।
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हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।
भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग ने बीते 5 वर्षों में अद्भुत वृद्धि दिखायी है। इसके साथ ही, इस तेजी से फैलते उद्योग का हिस्सा बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नये म्यूचुअल फंड घराने मैदान में कूद चुके हैं।