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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नहीं किया रेपो रेट में बदलाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

शुक्रवार 29 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी एचएसबीसी (HSBC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की वृद्धि की प्रवृत्ति को देखने से लगता है कि यह अगले दशक में जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा।

मंगलवार 26 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर घट कर 7% रहने का अनुमान है। एडीबी ने अप्रैल के अपने अनुमान में 7.4% की वृद्धि दर की बात कही थी। वर्ष 2018-19 के लिए वृद्धि अनुमान 7.6% से घटा कर 7.4% किया गया है।

सोमवार 25 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक मामलों पर सलाह देने के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन किया है। बिबेक देबरॉय (Bibek Debroy) इस आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन होंगे।

गुरुवार 21 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

केंद्र सरकार ने गुरुवार को किफायती आवास के लिए नई सावर्जनिक-निजी भागीदारी (PPP) नीति की घोषणा की है। इसके तहत अब से निजी भूमि पर भी प्राइवेट बिल्‍डरों द्वारा निर्मित किए जाने वाले प्रत्‍येक मकान के लिए 2.50 लाख रुपये तक की केंद्रीय सहायता दी जायेगी।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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