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रविवार 25 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) ने कहा है कि बेहतर मॉनसून, तेज सुधारों और केंद्र सरकार की ओर से समय पर फैसले लिए जाने की वजह से इस साल की आने वाली तिमाहियों में देश के आर्थिक विकास की दर 8% से अधिक रहेगी।

शुक्रवार 23 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय (Subrata Roy) को आज उच्चतम न्यायालय से नाटकीय घटनाक्रम के बाद अंतरिम राहत मिल गयी। समर्पण करने के लिए न्यायालय ने उन्हें 30 सितंबर तक की मोहलत दे दी है, जबकि आज सुबह न्यायालय ने उन्हें तुरंत जेल भेजे जाने का आदेश दे दिया था।

गुरुवार 22 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) में तीन सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। ये सदस्य हैं - भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रोफेसर चेतन घाटे, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक पमी दुआ और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर रवींद्र एच. ढोलकिया।

बुधवार 21 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

केंद्रीय कैबिनेट ने सालाना आम बजट फरवरी के अंत की परंपरागत तारीख से एक महीने पहले पेश किये जाने के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी।

मंगलवार 20 सितंबर : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

एफटीआईएल के प्रमोटर जिग्नेश शाह (Jignesh Shah) को सीबीआई ने एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज (MCX Stock Exchange) से जुड़े एक मामले में एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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