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साल भर से लंबा चला इंतजार, अब सेंसेक्स हुआ 86 हजार के पार, निफ्टी का भी नया शिखर

दुनिया भर के बाजार लगातार नये शिखर को छू रहे थे, लेकिन भारतीय बाजार की झिझक टूटने का नाम नहीं ले रही थी। आज अंतत: बाजार ने झिझक तोड़ी और सुबह-सुबह नया इतिहास रच दिया।

महँगाई में रिकॉर्ड गिरावट, पर जीएसटी बदलाव का पूरा लाभ नहीं पहुँचा - एमके ग्लोबल रिपोर्ट

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने खुदरा महँगाई पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अक्टूबर 2025 में खुदरा महँगाई का अब तक के सबसे निचले स्तर पर आना उसके अनुमानों के अनुरूप रहा है। एमके ग्लोबल का अनुमान 0.28% का था।

जीएसटी सुधार और खाद्य कीमतों में कमी से घटी खुदरा महँगाई : रजनी सिन्हा

केयरएज रेटिंग्स ने खुदरा महँगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचने के दो प्रमुख कारण बताये हैं। इसने कहा है कि हाल के जीएसटी सुधारों और खाद्य कीमतों में आ रही गिरावट के चलते ऐसा संभव हुआ है।

आरबीआई (RBI) ने नहीं बदलीं ब्याज दरें, तेज आर्थिक वृद्धि और कम महँगाई की आशा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज बुधवार (1 अक्टूबर) को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिये गये निर्णयों की घोषणा की।

क्या ट्रंप और मोदी के बीच टैरिफ युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी?

भारत और अमेरिका लंबे समय से वैश्विक आर्थिक प्रणाली के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और दोनों देशों के बीच सैकड़ों अरब डॉलर का व्यापार होता है। लेकिन हाल के महीनों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों ने रिश्तों में जटिलता पैदा कर दी है। क्या ट्रंप और मोदी के बीच टैरिफ युद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी?

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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