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पैकेज अच्छा है, पर थोड़ा है

गुल टेकचंदानी, निवेश सलाहकार

सरकार का आर्थिक पैकेज सही दिशा में है, लेकिन इसकी मात्रा पर बहस हो सकती है। मेरा मानना है कि यह काफी कम है। शायद सरकार को उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में ज्यादा कटौती करनी चाहिए थी।

अमेरिकी बाजारों में तेजी, आज एशिया भी उछला

शुक्रवार को बेहद कमजोर शुरुआत करने के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों ने काफी तेज वापसी की और आखिरकार डॉव जोंस में 3% की मजबूती रही। आज सुबह एशियाई बाजारों में भी जबरदस्त तेजी का रुख है।

आरबीआई ने रेपो और रिवर्स रेपो दरें घटाई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शनिवार को रेपो और रिवर्स रेपो दर में 1-1% की कमी करने की घोषणा की। रेपो दर 7.5% से घटकर 6.5% और रिवर्स रेपो दर 6% से घटकर 5% हो गयी है। लेकिन एसएलआर और सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।    

भारतीय शेयर बाजार लुढ़के

कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट  के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 265 अंक यानी 2.87%  की कमजोरी के साथ 8,965 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 74 अंक यानी 2.64% की कमी के साथ 2714 पर बंद हुआ। शुक्रवार सुबह भारतीय शेयर बाजारों पर अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजारों की गिरावट का असर दिखा और यह गिरावट के साथ खुले। आज सबसे ज्यादा गिरावट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, रियल्टी, धातु, तेल और गैस, टीईसीके, पीएसयू और बैंकिंग क्षेत्रों में आयी। आज ऑटो क्षेत्र अकेला हल्की मजबूती पर रहा।

बिनानी सीमेंट के शेयरों में तेजी

घरेलू रेटिंग एजेंसी द्वारा बिनानी सीमेंट की रेटिंग में सुधार किया गया है। बिनानी सीमेंट को मारीशस सरकार से वहां सीमेंट उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक अनुमति मिल गयी है। ऐसी सकारात्मक खबरों के बीच इसके शेयर भाव में तेजी का रुख देखा गया।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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